
जम्मू के एक शादी समारोह में माहौल पूरी तरह खुशियों से भरा था. ढोल, रोशनी और मेहमानों की चहल-पहल के बीच कोई नहीं जानता था कि कुछ ही सेकंड में यह जश्न खौफ में बदल जाएगा. जब पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah समारोह से निकलने ही वाले थे, तभी भीड़ में से एक शख्स अचानक आगे बढ़ा.
उसने जेब से बंदूक निकाली… और सीधे उनकी कनपटी पर तान दी. कुछ पल के लिए जैसे पूरा माहौल जम सा गया. और फिर जो हुआ, उसने वहां मौजूद हर शख्स की धड़कन रोक दी.
ट्रिगर दबा… लेकिन किस्मत ने मोड़ दिया खेल
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर ट्रिगर दबाने ही वाला था कि पीछे से किसी ने उसे धक्का दे दिया. संतुलन बिगड़ते ही वह गिर पड़ा, लेकिन गोली चल चुकी थी. गोली के छर्रे उछलकर पास खड़े उप मुख्यमंत्री Surinder Choudhary को जा लगे, जिससे वे घायल हो गए.
उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है.
20 साल से इंतजार कर रहा था हमलावर
पुलिस के मुताबिक आरोपी का नाम कमल सिंह जामवाल है. वह जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का रहने वाला है और इलाके में उसकी कई दुकानें हैं. प्राथमिक पूछताछ में उसने पुलिस को जो बताया, वह और भी चौंकाने वाला है.
उसका कहना है कि वह करीब 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को मारने का इंतजार कर रहा था. उसके मुताबिक यह उसका निजी एजेंडा था और उसने हमले के लिए अपनी लाइसेंसी बंदूक का इस्तेमाल किया.
शादी समारोह में मची अफरा-तफरी
यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके के रॉयल पार्क में हुई, जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े एक नेता की बेटी की शादी का कार्यक्रम चल रहा था. जैसे ही गोली चली, वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.

सुरक्षा में तैनात पुलिस और National Security Guard के कमांडो तुरंत हरकत में आए और आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया.
भीड़ का गुस्सा और पुलिस की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद भीड़ का गुस्सा भी भड़क उठा. मौके पर मौजूद लोगों ने हमलावर को घेर लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी. हालांकि पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर आरोपी को भीड़ से बचाया और हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी.
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है. इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद कोई व्यक्ति पूर्व मुख्यमंत्री के इतना करीब कैसे पहुंच गया? सुरक्षा में पुलिस के अलावा NSG कमांडो भी तैनात थे, फिर भी हमलावर भीड़ में घुलमिलकर मंच के पास तक पहुंच गया.
राजनीति और सुरक्षा की सच्चाई
राजनीति की दुनिया में मंच पर मुस्कानें और हाथ मिलाने के दृश्य अक्सर दिखते हैं. लेकिन परदे के पीछे सुरक्षा का पूरा तंत्र हमेशा चौकन्ना रहता है.
जम्मू की इस घटना ने यह याद दिला दिया कि लोकतंत्र में नेता चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, एक लापरवाही का पल पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर देता है.
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